स्वास्थ्य सेवा मौलिक अधिकार, न कि विशेषाधिकार: विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर
“नई दिल्ली में आयोजित 12वें अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संवाद को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा किसी विशेष वर्ग का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार होनी चाहिए। उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भारत के योगदान और ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की चुनौतियों पर जोर दिया।”
ग्लोबल साउथ को आत्मनिर्भर बनने की जरूरत
डॉ. जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश अनिश्चित आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था की अस्थिरता के बंधक नहीं बन सकते। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकासशील देशों को स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी, ताकि वैश्विक आपूर्ति संकट का उन पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
भारत की वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भूमिका
विदेश मंत्री ने भारत की वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत न केवल स्वास्थ्य समाधानों का प्रदाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत लिंक भी है। उन्होंने भारत द्वारा महामारी के दौरान विभिन्न देशों को वैक्सीन और दवाइयों की आपूर्ति का उदाहरण दिया।
आयुष्मान भारत योजना से करोड़ों को लाभ
डॉ. जयशंकर ने सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों नागरिकों को मुफ्त और सुलभ स्वास्थ्य बीमा सुविधा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस योजना ने देश के गरीब और वंचित वर्गों को चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत का विजन
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों के माध्यम से एक वैश्विक स्वास्थ्य लीडर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दवा निर्माण, टीकाकरण अभियान, और स्वास्थ्य अनुसंधान में भारत के योगदान को रेखांकित किया।
