नई दिल्ली में टिकाऊ डेयरी फार्मिंग कार्यशाला का आयोजन
“नई दिल्ली में कल एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा, जिसमें टिकाऊ डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह कार्यशाला पर्यावरणीय जिम्मेदारी और आर्थिक विकास को संतुलित करते हुए डेयरी क्षेत्र में नवाचार और सुधार को प्रोत्साहित करेगी।”
इस कार्यशाला में सहकारिता मंत्रालय और पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यपालन मंत्रालय की विभिन्न नीतियों और पहलों पर चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देना और डेयरी अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।
बायोगैस संयंत्रों के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
कार्यशाला के दौरान कई राज्यों में बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह पहल डेयरी उद्योग से उत्पन्न अपशिष्ट को बेहतर ढंग से उपयोग करने और उसे बायोगैस तथा जैविक उर्वरकों में परिवर्तित करने में सहायक होगी।
तकनीकी सत्रों का आयोजन
इस कार्यशाला में टिकाऊ खाद प्रबंधन मॉडल पर तकनीकी सत्रों का आयोजन भी किया जाएगा। इन सत्रों में विशेषज्ञ और नीति निर्माताओं द्वारा डेयरी अपशिष्ट प्रबंधन, जैविक उर्वरकों और ऊर्जा उत्पादन पर गहन चर्चा की जाएगी।
टिकाऊ डेयरी फार्मिंग का महत्व
टिकाऊ डेयरी फार्मिंग से न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध होती है। बायोगैस संयंत्रों की स्थापना से ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और डेयरी अपशिष्ट का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
उम्मीदें और संभावनाएं
यह कार्यशाला डेयरी उद्योग के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे टिकाऊ डेयरी प्रथाओं को अपनाने, पर्यावरण-संवेदनशील कृषि को प्रोत्साहित करने और सहकारी क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।