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2030 तक भारत का इस्पात उत्पादन 30 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य

“भारत ने 2030 तक 30 करोड़ टन इस्पात उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम भारत को वैश्विक इस्पात उत्पादन में अग्रणी स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।”


लक्ष्य का उद्देश्य:

  1. वैश्विक प्रतिस्पर्धा:
    • भारत को विश्व के शीर्ष इस्पात उत्पादक देशों में शामिल करना।
  2. औद्योगिक विकास:
    • इस्पात उत्पादन के माध्यम से औद्योगिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना।
  3. रोजगार सृजन:
    • इस्पात क्षेत्र में उत्पादन बढ़ने से नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  4. आत्मनिर्भर भारत:
    • मेक इन इंडिया के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना।

भारत का इस्पात क्षेत्र:

वर्तमान में, भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश है।

  • 2022 में उत्पादन: लगभग 12 करोड़ टन।
  • 2030 का लक्ष्य: इसे बढ़ाकर 30 करोड़ टन करना।

रणनीतियां और योजनाएं:

  1. नई तकनीकों का उपयोग:
    • इस्पात उत्पादन में हरित प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।
  2. निजी क्षेत्र का सहयोग:
    • इस्पात उत्पादन बढ़ाने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में सहयोग।
  3. निर्यात को बढ़ावा:
    • इस्पात के निर्यात को प्रोत्साहित कर वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाना।
  4. संरचनात्मक सुधार:
    • इस्पात क्षेत्र में नीतिगत सुधार और निवेश प्रोत्साहन।

पर्यावरणीय दृष्टिकोण:

एचडी कुमारस्वामी ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कहा:

“हरित इस्पात उत्पादन के माध्यम से पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जाएगा।”

  • हरित ऊर्जा का उपयोग:
    • उत्पादन के लिए सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग।
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी:
    • इस्पात उत्पादन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करना।

चुनौतियां और समाधान:

  1. कच्चे माल की उपलब्धता:
    • देश में लौह अयस्क और कोयले की कमी को दूर करना।
  2. तकनीकी उन्नति:
    • अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित करना।
  3. निवेश की जरूरत:
    • इस्पात क्षेत्र में बड़े पैमाने पर घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करना।

लक्ष्य का प्रभाव:

  1. आर्थिक विकास:
    • इस्पात उत्पादन बढ़ने से GDP में वृद्धि होगी।
  2. रोजगार के अवसर:
    • 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना।
  3. वैश्विक पहचान:
    • भारत की वैश्विक इस्पात बाजार में हिस्सेदारी बढ़ेगी।
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