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कर्नाटक सरकार के अल्पसंख्यक आरक्षण पर भाजपा का विरोध

“भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कर्नाटक सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के लिए लोक निर्माण अनुबंधों में 4% आरक्षण देने के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। भाजपा के प्रवक्ता अनिल एंटनी ने आज नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।”

उन्होंने कहा कि इस तरह का कोटा डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या राज्य में अल्पसंख्यकों का मतलब केवल एक समुदाय है या सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों को इसमें शामिल किया गया है।

भाजपा की मांग: सरकार अपना फैसला वापस ले

भाजपा ने राज्य सरकार से इस आरक्षण नीति को तुरंत रद्द करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि सरकार को सभी समुदायों के साथ समानता और निष्पक्षता का व्यवहार करना चाहिए, न कि तुष्टीकरण की राजनीति करनी चाहिए।

राजनीतिक विवाद गहराया

  • कांग्रेस का पक्ष – सरकार का दावा है कि यह आरक्षण नीति समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए है।
  • भाजपा की आपत्ति – इसे असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण बताते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया।
  • संवैधानिक बहस – विशेषज्ञों का मानना है कि धर्म आधारित आरक्षण संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

क्या होगा आगे?

इस विवाद को लेकर कर्नाटक में राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। विपक्षी दल भाजपा इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपना रही है, जबकि कांग्रेस अपने फैसले को जायज ठहराने में जुटी हुई है। अब देखना होगा कि क्या सरकार इस आरक्षण नीति को बरकरार रखती है या विपक्ष के दबाव में इसे वापस लेती है।

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