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भारत-न्यूजीलैंड संबंध: व्यापार, शिक्षा और सहयोग के नए अवसर

“राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच घनिष्ठ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के रिश्ते लोकतंत्र, कानून के शासन और सांस्कृतिक मूल्यों की साझी विरासत पर आधारित हैं।”

राष्ट्रपति भवन में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का स्वागत करते हुए उन्होंने शैक्षिक आदान-प्रदान को भारत-न्यूजीलैंड संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों के बीच संस्थागत आदान-प्रदान, न्यूजीलैंड के विश्वविद्यालयों की भारत में शाखाएं खोलने और शैक्षिक सहयोग को बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।

व्यापार और आर्थिक सहयोग में विस्तार

राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों के विकास पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कृषि, बागवानी, वानिकी, सीमा शुल्क, आपदा प्रबंधन और पारंपरिक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर उभर रहे हैं।

उन्होंने न्यूजीलैंड की प्रगति में भारतीय समुदाय के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। भारतीय प्रवासी समुदाय ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और अधिक मजबूत हुए हैं।

संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

राष्ट्रपति मुर्मु ने पिछले वर्ष अगस्त में अपनी न्यूजीलैंड यात्रा को याद करते हुए कहा कि वहां की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता ने उन पर अमिट छाप छोड़ी है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।

प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की भारत यात्रा और राष्ट्रपति मुर्मु की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान हुए समझौते भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी को एक नई गति प्रदान करेंगे। यह संबंध भविष्य में व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्रों में और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ेंगे।

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