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भारत में चार नए रामसर स्थल घोषित, पर्यावरण संरक्षण में अहम कदम

“भारत सरकार ने देश में चार नए स्थलों को रामसर सूची में शामिल करने की घोषणा की है। इस नई घोषणा के साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 89 हो गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देश में पर्यावरण संरक्षण और आर्द्रभूमियों के महत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है।”


रामसर स्थल क्या हैं?

रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियां (Wetlands) हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व की सूची में शामिल किया जाता है।
✔ यह 1971 के रामसर समझौते के तहत संरक्षित किए जाते हैं।
✔ यह स्थल जैव विविधता को बनाए रखने और जलवायु संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
✔ भारत में अब तक कई आर्द्रभूमियों को रामसर स्थलों के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।


ये हैं नए घोषित चार रामसर स्थल:

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि विश्व आर्द्रभूमि दिवस से पहले सरकार ने तमिलनाडु में सक्करकोट्टई पक्षी अभ्यारण्य और थेर्थंगल पक्षी अभयारण्य, सिक्किम में खेचोपलरी आर्द्रभूमि और झारखंड में उधवा झील को देश के रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।


रामसर स्थलों का महत्व क्यों है?

📌 पर्यावरण संतुलन: ये आर्द्रभूमियां जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं।
📌 वन्यजीव संरक्षण: ये स्थल कई दुर्लभ पक्षियों और जीवों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं।
📌 जल संरक्षण: आर्द्रभूमियां भूजल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
📌 पर्यटन और रोजगार: यह क्षेत्र इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देते हैं।

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