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फेम-टू योजना: 15 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को मिला लाभ

“भारत सरकार की फेम-टू योजना (Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles in India Phase 2) के तहत अब तक 15 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को इस योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि देश में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”

फेम-टू योजना का उद्देश्य

फेम-टू योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना और देश में स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करना है।

  • लॉन्च वर्ष: 2019
  • अवधि: 5 साल (मार्च 2024 तक)।
  • बजट: 10,000 करोड़ रुपये।
  • लक्ष्य: 70 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहित करना।

योजना के तहत लाभ

  • सब्सिडी: ईवी खरीद पर वित्तीय सहायता।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर: चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण और विस्तार।
  • वाहनों की श्रेणी: दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया और सार्वजनिक परिवहन।
  • स्वदेशी उत्पादन: भारत में ईवी निर्माण और घटकों के उत्पादन को प्रोत्साहित करना।

अब तक की उपलब्धियां

  1. वाहन लाभार्थी:
    • 15 लाख से अधिक ईवी मालिकों ने सब्सिडी का लाभ उठाया।
    • सबसे अधिक लाभ दोपहिया और तिपहिया ईवी उपयोगकर्ताओं को हुआ।
  2. पर्यावरणीय प्रभाव:
    • लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी।
    • देश में स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन को बढ़ावा।
  3. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर:
    • देशभर में सैकड़ों सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए।

सरकार का बयान

केंद्र सरकार के अनुसार, फेम-टू योजना ने न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा दिया है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ाया है। सरकार ने यह भी कहा कि योजना के अगले चरण में चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार और अधिक वाहन श्रेणियों को शामिल करने पर जोर दिया जाएगा।

चुनौतियां और समाधान

  • चुनौतियां:
    • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमित पहुंच।
    • ईवी की उच्च लागत।
  • समाधान:
    • ग्रामीण क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार।
    • सब्सिडी बढ़ाने और उत्पादन लागत घटाने के उपाय।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण और ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि फेम-टू योजना देश में ईवी के तेजी से अपनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल प्रदूषण को कम करेगा, बल्कि भारत को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।

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