सिक्किम भाजपा ने तीस्ता जलविद्युत परियोजना के तीसरे चरण के पुनर्मूल्यांकन की मांग की
“सिक्किम में तीस्ता जलविद्युत परियोजना के तीसरे चरण को लेकर भाजपा की राज्य इकाई ने तत्काल पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाना आवश्यक है।”
प्रमुख चिंताएं और पुनर्मूल्यांकन की वजह
- पर्यावरणीय प्रभाव – स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और नदी के प्रवाह पर असर।
- स्थानीय समुदायों की चिंताएं – विस्थापन और आजीविका पर प्रभाव।
- भूकंपीय क्षेत्र में निर्माण जोखिम – सिक्किम भूकंप संभावित क्षेत्र में आता है, जिससे परियोजना की संरचनात्मक सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।
- स्थानीय सरकार और विशेषज्ञों से परामर्श – परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले सभी हितधारकों की राय ली जाए।
भाजपा सिक्किम इकाई की मांगें
- परियोजना के प्रभावों की पुन: समीक्षा की जाए।
- स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाए।
- सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी विचार करे।
- ट्रांसपेरेंट स्टडी रिपोर्ट प्रकाशित की जाए।
ऊर्जा उत्पादन बनाम पर्यावरणीय संरक्षण
हालांकि जलविद्युत परियोजनाएं ग्रीन एनर्जी और बिजली आपूर्ति के लिए जरूरी हैं, लेकिन सिक्किम जैसे पर्यावरण-संवेदनशील राज्य में इनके प्रभावों का सावधानीपूर्वक आकलन किया जाना जरूरी है।
आगे की संभावनाएं
- सरकार और संबंधित एजेंसियां इस मुद्दे पर विचार करेंगी।
- परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
- हितधारकों से परामर्श कर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
