भारत हाइपर-लूप तकनीक में बनाएगा नया कीर्तिमान
“केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि आईआईटी मद्रास में स्थित 410 मीटर लंबी हाइपर-लूप टेस्ट ट्यूब एशिया की सबसे लंबी हाइपर-लूप परीक्षण सुविधा है। यह जल्द ही दुनिया की सबसे लंबी हाइपर-लूप टेस्ट सुविधा बनने की ओर अग्रसर है।”
आईआईटी मद्रास में हुआ लाइव परीक्षण
श्री वैष्णव ने आईआईटी मद्रास के डिस्कवरी कैंपस में हाइपर-लूप परीक्षण सुविधा का निरीक्षण किया और इसका लाइव प्रदर्शन देखा। इस अनुभव को उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा भी किया।
उन्होंने बताया कि भारत हाइपर-लूप परिवहन प्रणाली के लिए तैयार हो रहा है, क्योंकि इस अत्याधुनिक तकनीक ने अब तक के परीक्षणों में बेहतरीन परिणाम दिए हैं।
हाइपर-लूप परियोजना में रेलवे की भागीदारी
- इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों का निर्माण – इस परियोजना के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों को चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में विकसित किया जाएगा।
- रेलवे की तकनीकी एवं वित्तीय सहायता – भारतीय रेलवे इस प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।
- नवाचार को बढ़ावा – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नवाचार और तकनीकी प्रगति को प्राथमिकता दी जा रही है।
हाइपर-लूप टेक्नोलॉजी से संभावित लाभ
- अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली – हाइपर-लूप यात्रा को तेज, किफायती और कुशल बनाएगा।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी – यह पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रणाली होगी।
- भारतीय तकनीक को वैश्विक पहचान – भारत इस क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है।
भविष्य में हाइपर-लूप परिवहन का सपना
इस परियोजना से भारत में हाइपर-लूप टेक्नोलॉजी को नया आयाम मिलेगा। यदि परीक्षण सफल होते हैं, तो यह देश के परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।