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नवाचार और अनुसंधान से भारत बनेगा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का वैश्विक नेता: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

हैदराबाद: भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाने के उद्देश्य से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने नवाचार और अनुसंधान की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हैदराबाद में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि नवाचार और अनुसंधान देश की प्रगति के लिए अनिवार्य हैं।

वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान की महत्ता

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में अधिक निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र से भी नवाचार में सहयोग देने का आग्रह किया ताकि युवा उद्यमी और वैज्ञानिक नई ऊँचाइयाँ छू सकें।

चंद्रयान मिशन से मिली प्रेरणा

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने भारत के चंद्रयान मिशन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि शुरुआती चुनौतियों के बावजूद यह मिशन सफल हुआ और पूरी दुनिया ने भारत के वैज्ञानिक कौशल को पहचाना। उन्होंने छात्रों को इससे प्रेरणा लेने और चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ने की सीख दी।

छात्रों के लिए विशेष संदेश

धनखड़ ने छात्रों को रचनात्मकता और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा भारत के भविष्य निर्माता हैं और उन्हें अपनी क्षमताओं का उपयोग कर देश को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना चाहिए।

भारत के लिए वैश्विक नेतृत्व की दिशा

विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति को गति देने के लिए उपराष्ट्रपति ने सरकार, शिक्षाविदों और कॉर्पोरेट जगत से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक मंच पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अग्रणी स्थान प्राप्त करना चाहिए, जिससे देश आत्मनिर्भरता की ओर और तेजी से बढ़ सके।
इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा सहित कई गण्यमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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