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लैंगिक समानता और महिला विकास भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा: डॉ. एस जयशंकर

“भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक मूलभूत प्राथमिकता के रूप में शामिल किया गया है। उन्होंने यह बयान एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान दिया, जहां उन्होंने भारत की महिला-केंद्रित नीतियों पर प्रकाश डाला।”

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत हमेशा से महिला अधिकारों और लैंगिक न्याय के समर्थन में रहा है और यह दृष्टिकोण अब भारत की वैश्विक नीतियों का भी हिस्सा बन चुका है।

लैंगिक समानता पर भारत की विदेश नीति:

विदेश मंत्री ने बताया कि भारत की विदेश नीति में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को विशेष महत्व दिया गया है।

  • भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर महिला अधिकारों के लिए हमेशा आवाज उठाई है।
  • भारत ने कई देशों के साथ महिला-केंद्रित परियोजनाओं में सहयोग किया है।
  • संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी भारत ने महिला अधिकारों के मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई है।

महिला विकास के लिए भारत की पहल:

डॉ. एस जयशंकर ने भारत में चल रही महिला विकास परियोजनाओं का भी जिक्र किया।

  • भारत में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य में मदद दी जा रही है।
  • महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भारत ने कई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
  • भारत महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए तकनीकी समाधान भी प्रदान कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का रुख:

भारत ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र, G20, और ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर महिला अधिकारों को लेकर मजबूत रुख अपनाया है।

  • भारत ने कई बार लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई है।
  • भारत महिला उद्यमियों को वैश्विक मंचों पर मौका देने की भी वकालत करता रहा है।

लैंगिक समानता पर भारत की प्रमुख पहलें:

योजना/पहलविवरण
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओमहिलाओं को शिक्षा और सुरक्षा में मदद देना।
स्टार्टअप इंडियामहिला उद्यमियों को नए स्टार्टअप शुरू करने में सहायता।
महिला शक्ति केंद्रग्रामीण इलाकों में महिलाओं को सशक्त बनाना।
प्रमाणिक मंचअंतरराष्ट्रीय मंचों पर महिला नेतृत्व को बढ़ावा देना।

महिला सशक्तिकरण के फायदे:

डॉ. जयशंकर ने कहा कि महिला सशक्तिकरण से न केवल सामाजिक विकास होता है, बल्कि यह आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत करता है।

  • महिलाओं की भागीदारी से देशों के बीच संबंधों में सुधार होता है।
  • महिला उद्यमिता से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • शांति और सुरक्षा के प्रयासों में भी महिलाओं की भागीदारी अहम होती है।

डॉ. एस जयशंकर का बयान:

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा: “लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण सिर्फ सामाजिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह भारत की विदेश नीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम मानते हैं कि महिला विकास से ही समाज और दुनिया का समग्र विकास संभव है।”


भारत का महिला सशक्तिकरण की दिशा में वैश्विक योगदान:

  1. भारत ने कई देशों में महिला-केंद्रित परियोजनाएं शुरू की हैं।
  2. भारत ने महिला शिक्षा, स्वास्थ्य, और सुरक्षा में सहयोग किया है।
  3. भारत संयुक्त राष्ट्र महिला कार्यक्रम का एक प्रमुख सहयोगी है।

निष्कर्ष:

डॉ. एस जयशंकर का यह बयान दर्शाता है कि भारत लैंगिक समानता और महिला विकास को न केवल राष्ट्रीय नीति, बल्कि वैश्विक कूटनीति का भी अहम हिस्सा मानता है। भारत ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जो महिलाओं को सशक्त और समाज को समृद्ध बनाने में मदद करेंगे।

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