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EASD समिट में प्रस्तुत स्टडी: इंसुलिन रेजिस्टेंस का 31 बीमारियों से संबंध, महिलाओं में मौत का जोखिम 11% तक बढ़ सकता है

ब्रसेल्स, 14 सितंबर: यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज (EASD) के एनुअल समिट में हाल ही में प्रस्तुत एक स्टडी ने इंसुलिन रेजिस्टेंस के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में नई जानकारी दी है। इस स्टडी में पाया गया है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस का 31 बीमारियों से सीधा संबंध है, जिनमें हाइपरटेंशन, हार्ट डिजीज और स्लीप डिसऑर्डर्स शामिल हैं। इसके कारण महिलाओं की कम उम्र में मौत का जोखिम 11% तक बढ़ सकता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस: यह एक कॉम्प्लेक्स कंडीशन है, जिसमें शरीर इंसुलिन के प्रति कम रिस्पॉन्ड करता है। इंसुलिन एक हॉर्मोन है, जिसे पैंक्रियाज द्वारा बनाया जाता है और यह ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करने के लिए जरूरी है।

वैश्विक डेटा: जर्नल ऑफ एंडोक्रोनोलॉजिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, दुनिया भर में 15.5% से लेकर 46.5% वयस्क किसी-न-किसी रूप में इंसुलिन रेजिस्टेंस से प्रभावित हैं।

चीन की शेडोंग यूनिवर्सिटी के रिसर्च: रिसर्चर जिंग वू और उनकी टीम ने यूके बायोबैंक के डेटा बेस से लगभग 4 लाख 29 हजार लोगों के डेटा का विश्लेषण किया। स्टडी में पता चला कि इंसुलिन रेजिस्टेंस के ज्यादातर मामले पुरुषों, सिगरेट पीने वालों, बुजुर्ग व्यक्तियों, मोटे लोगों और सिडेंटरी लाइफ स्टाइल जीने वालों में देखे गए हैं।

स्टडी के मुख्य बिंदु:

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण हाइपरटेंशन, हार्ट डिजीज, और स्लीप डिसऑर्डर्स का खतरा बढ़ता है।
  • महिलाओं में मौत का जोखिम 11% तक बढ़ सकता है।
  • शुरुआती स्टेज में लाइफ स्टाइल और खानपान में बदलाव करके इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
  • लंबे समय तक इंसुलिन रेजिस्टेंस रहने पर कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं।

ग्राफिक: स्टडी में इंसुलिन रेजिस्टेंस से संबंधित नई जानकारियों को ग्राफिक में देखा जा सकता है, जो यह दर्शाती हैं कि यह स्थिति किस प्रकार विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी है।

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