क्या आप रिलेशनशिप में फैसले लेने से घबराते हैं? जानिए ‘डिसाइडोफोबिया’ क्या है और इसे दूर करने के लिए साइकोलॉजिस्ट के 12 टिप्स
रिश्तों में फैसला लेना कभी-कभी बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई लोग छोटी-बड़ी बातों पर फैसला करने से घबराते हैं, जिससे उनका रिलेशनशिप प्रभावित होता है। अगर आप भी इसी स्थिति से गुजर रहे हैं, तो हो सकता है कि आप ‘डिसाइडोफोबिया’ से जूझ रहे हों। यह एक ऐसी मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति फैसला लेने से डरता है या निर्णय लेने में असहज महसूस करता है।
क्या है डिसाइडोफोबिया?
डिसाइडोफोबिया (Decidophobia) एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति छोटे से छोटे या बड़े से बड़े फैसले लेने में कठिनाई महसूस करता है। यह स्थिति उस समय उत्पन्न होती है जब कोई व्यक्ति यह मानने लगता है कि उसका निर्णय गलत साबित हो सकता है या उसके फैसले का असर दूसरों पर नकारात्मक हो सकता है। यह फोबिया तब और गंभीर हो जाता है जब व्यक्ति अपने फैसलों के प्रति पूर्णतया अविश्वास करता है और दूसरों पर निर्भर रहता है।
डिसाइडोफोबिया के लक्षण
- फैसले लेने में असमर्थता या अत्यधिक डर
- निर्णय लेने के बाद तनाव और बेचैनी महसूस करना
- बार-बार दूसरों से सलाह लेना
- फैसलों से बचने के लिए टालमटोल करना
- व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में अनिश्चितता और असुरक्षा का अनुभव करना
रिलेशनशिप में डिसाइडोफोबिया का असर
रिलेशनशिप में डिसाइडोफोबिया के कारण कई बार व्यक्ति अपने पार्टनर के साथ फैसले लेने में असहज हो जाता है। यह स्थिति रिश्ते में तनाव और गलतफहमियों का कारण बन सकती है। जब पार्टनर को बार-बार छोटी चीजों में भी निर्णय लेने के लिए कहना पड़ता है, तो इससे असंतुलन पैदा हो सकता है। निर्णय लेने में घबराहट और असमर्थता रिश्ते की मजबूती को कमजोर कर सकती है।
डिसाइडोफोबिया से कैसे निपटें? साइकोलॉजिस्ट के 12 टिप्स
अगर आप भी डिसाइडोफोबिया से जूझ रहे हैं और इसे दूर करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित 12 सुझाव आपकी मदद कर सकते हैं:
- छोटे फैसलों से शुरुआत करें: सबसे पहले छोटे और साधारण फैसले लेने की आदत डालें। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और धीरे-धीरे आप बड़े फैसलों के लिए तैयार होंगे।
- अपनी भावनाओं को समझें: डिसाइडोफोबिया का एक बड़ा कारण है अपनी भावनाओं को न समझना। जब आप किसी निर्णय से डरते हैं, तो इस डर की वजह को समझने का प्रयास करें।
- परफेक्शन से बचें: कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता, और यह बात फैसले लेने पर भी लागू होती है। हर फैसला सही हो, यह जरूरी नहीं है। गलतियों से सीखना भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- समय की सीमा तय करें: किसी भी फैसले को लेने के लिए खुद को एक समय सीमा दें। इससे आप बेवजह फैसले को टालने से बच सकते हैं।
- विकल्पों पर विचार करें: किसी भी फैसले के लिए सभी संभावित विकल्पों को विचार करें। जब आप सभी संभावनाओं पर ध्यान देंगे, तो फैसला लेना आसान हो जाएगा।
- सकारात्मक सोच विकसित करें: नेगेटिव थिंकिंग की बजाय सकारात्मक सोच को अपनाएं। खुद को यह बताएं कि आप सही निर्णय ले सकते हैं और आपकी सोच पर भरोसा करना जरूरी है।
- स्वतंत्रता का अभ्यास करें: निर्णय लेने में स्वतंत्रता महसूस करें। दूसरों की सलाह लेना जरूरी है, लेकिन अपनी क्षमता पर भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
- समय-समय पर रिव्यू करें: अपने फैसलों को समय-समय पर रिव्यू करें। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपने क्या सही किया और किससे सीखा जा सकता है।
- माइंडफुलनेस और मेडिटेशन का अभ्यास करें: ध्यान और माइंडफुलनेस तकनीक आपके मानसिक तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे आपकी सोच साफ होती है और आप फैसले लेने में अधिक स्पष्टता महसूस करते हैं।
- आत्म-विश्लेषण करें: आत्म-विश्लेषण करने से आप अपनी कमजोरियों और ताकतों को समझ सकते हैं। यह आपकी निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है।
- दूसरों की नकल न करें: अपने फैसलों को दूसरों की तुलना में न लें। हर व्यक्ति की परिस्थितियां और सोच अलग होती हैं, इसलिए अपने व्यक्तिगत अनुभवों और सोच के आधार पर निर्णय लें।
- पेशेवर मदद लें: अगर डिसाइडोफोबिया ज्यादा गंभीर है और आपकी निजी और पेशेवर जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो साइकोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है। थेरेपी और काउंसलिंग से इस डर को दूर करने में मदद मिल सकती है।